तेरी यादों के उलझते गहराते अँधेरे
अँधेरी रातों के कसते तंग होते घेरे
याद हैं ज़ुल्फ़ों के वो घनघोर अँधेरे
वो नींद सुकून की सवेरे से अंधेरे
तेरे लब चमकते हैं ख़ूनी खंजरों की तरह
कोई चिराग़ न रोशन हो जाये क़ातिल पे मेरे
रहने दे दफ़न मुझको दामन में अपने
कहीं मिट्टी न हटा देना चेहरे से मेरे
तेरे उरोज़ों के नीचे वो धड़कते अँधेरे
मेरा दिल धड़क रहा है 'दोस्त' दिल से तेरे
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