शनिवार, 8 अक्टूबर 2022

हिम्मत

हिम्मत भी क्या चीज़ है
ये इंसान को कुछ करने के लिए उकसाती है
कुछ अलग, कुछ नया, रोमांचक
ऐसा कुछ, जो करने से वो डरता रहा है
घबराता रहा है
उसे ग़ैरज़रूरी बनाता रहा है
भले ही वो चीज़ उसके मतलब की हो
शायद ज़रुरत की भी हो
पर आड़े आ जाती हैं दिमाग़ी कमज़ोरियां,
आम रुकावटें
वैसी ही जैसी हर नुक्कड़ पर दिख जाती हैं;
'शायद नहीं हो पायेगा
अब इतना ज़रूरी भी तो नहीं
लाखों लोग इसके बग़ैर जी ही रहे हैं ना
उनमें मैं भी एक और सही' - इत्यादि

अब एक हीरे को हासिल करने में ऐसी रुकावटें तो आएंगी ही
हीरा आख़िर हीरा है
हीरा आपके अंदर की बात है
अंदर छुपी हुई इच्छाएं और कामनाएं हैं
ये अंदर की बातें हीरे-मोतियों से कम नहीं होतीं
बाहर की बातें और आदतें तो सबको पता हैं
वो दिखाई देती हैं
इसलिए वो साधारण हैं
पर जो अंदर है वो क़ीमती है
वो वर्षों पुरानी उग्र इच्छाएं हो सकती हैं
दबी हुई गहरी हसरतें,
अभिलाषाएं हो सकती हैं
कहते  हैं ना
बंद मुट्ठी सवा लाख की
खुली तो प्यारे ख़ाक की
तो जिसने हिम्मत करके हीरे की तरफ क़दम बढ़ाया,
उसका मूल्य बढ़ गया
चाहे वो हीरा एक नया विचार हो 
कोई नायाब हुनर हो, एक नई तरकीब हो,
नई कसरत, प्राणायाम, नया योगासन
ये सब हीरे आपकी क़ीमत बढ़ा सकते हैं
जीवन को नए मायने दे सकते हैं

पर - सबसे पहले ये निर्णय कर लीजिये
कि आप अपने आज के मूल्य से कितने संतुष्ट हैं
संतुष्ट हैं भी या नहीं
अगर आप इसी से खुश हैं
तो हिम्मत आपके किसी काम की नहीं
रहने दीजिये ये सब झंझट
जैसे अभी तक गुज़री है
बाक़ी भी गुज़र ही जाएगी
हिम्मत को हासिल करना भी एक हीरे को पाने जैसा ही है
और 'दोस्त' हीरे तो हर एक की क़िस्मत भी में नहीं होते



डर नूतन से

ठीक है, ठीक है, माना  । क्या  माना ? यही, कि जनाब ने मुझे बुलाया नहीं था  । तो फिर ये टटपुँजिया सा वाहन लेकर यहाँ क्यों तशरीफ़ लाये हैं? क्या...