हम पहुँच न पाये वक़्त पर
अफ़सोस
है तुम्हें इंतज़ार
करना पड़ा
और
नाराज़गी का कहर हमें
झेलना पड़ा
वो
तमतमाया चेहरा
वो
मोती पसीने के
माथे
पे होठों पे
वो
झुंझलाहट की भाषा
पूरे
बदन पे
तुम्हें याद
हो तो
हमारी अटपटी रूकती
अटकती
चाल भी कुछ कह
थी
... छोडो जाने
दो
पर
हमें ये ग़िला
रहेगा
तुम
उस इंतज़ार का
लुत्फ़ न उठा
सके
हम
तो तुम्हारे इंतज़ार
में
जाने
क्या क्या कर
गए
कितने
किस्से गढ़ लिए
कितनी
ग़ज़लें लिख गए
हर
ख्याल के बाद
सामने आता तुम्हारा चेहरा
और हमारे होठों
पर एक मुस्कान
... ख़ैर जाने
दो
मैंने तुम्हारा इंतज़ार ज़रूर किया
लम्बे इंतज़ार पे ग़ुरूर भी किया
पर तुम हमेशा मेरे साथ रही
पर तुम हमेशा मेरे साथ रही
आस पास रही
जब
जब तुम नहीं
आई
और
मैं मुँह लटकाये वापिस गया
मैं
तुम्हे भी अपने
साथ ले गया
तुमने
सुना ही होगा
वो
मशहूर ख्याल
"तुम मेरे
पास होती हो,
जब
कोई दूसरा नहीं
होता"
... छोड़ो ये
भी जाने दो

