कभी ऐसा सोचा
जिनको मिलना था
वो बिना मिले
ही चले गये
और ख़त लिखा
कि तुमसे मिल
कर बड़ा मज़ा
आया
उस दिन मौसम कितना ख़ुशगवार था
चौदहवीं के चाँद पे निखार था
तारे भी बिखरे हुए थे
उस दिन मौसम कितना ख़ुशगवार था
चौदहवीं के चाँद पे निखार था
तारे भी बिखरे हुए थे
खुशबु के समंदर
हवा पे तैर
रहे थे
कैसी अजीब बात
है
इतनी सारी बातें
लिख डालीं
जो हुई ही नहीं
जो हुई ही नहीं
कोई ऐसा कैसे
लिख सकता है
मैं तो वहां
पहुंचा ही नहीं
और वो कहता
है
हम मिल भी लिए
हम मिल भी लिए
पर ज़िक्र चाँद
तारों का
खुशबू और हवाओं का
अब ख़याल आया ...
शायद मेरा वक़्त और मैं
एक दुसरे से बिछड़ गए हैं
वो धागे टूट गए हैं
जो मुझे मेरे समय से जोड़े रखते हैं
खुशबू और हवाओं का
अब ख़याल आया ...
शायद मेरा वक़्त और मैं
एक दुसरे से बिछड़ गए हैं
वो धागे टूट गए हैं
जो मुझे मेरे समय से जोड़े रखते हैं
मुझे जो कुछ कल और, परसों
करना है / था
वो सब हो
चुका है
मेरा आने वाला
कल बीत चुका
है
