अरे सुनो मुझसे मुहब्बत करोगी ?
सुनो तो सही
एक मिनट, एक मिनट, बस एक मिनट
मोहब्बत की ही तो बात कर रहा हूँ
शादी की नहीं
मोहब्बत में किसी का कुछ नहीं जाता
शादी में तो तुम्हें पता ही होगा।
ज़िन्दगी दांव पे लगानी पड़ती है
वो ज़िन्दगी भर का खेल जो है
प्यार का क्या है
मुझे कोई पसंद आयी
किसी को मैं पसंद आया
"नमस्ते जी क्या आप मेरे साथ एक कप चाय पिएंगी"
"ठीक है पर पहले एक गिलास पानी"
देखा आपने
बस इतनी सो बात है
इसमें क्या डरना
चाय के दौरान कुछ बातें होंगी ही
शायद फोन नंबरों की अदला बदली हो जाये
फिर शायद फोन हो भी जाये
एक कप चाय, एक कॉफी, एक वडा पाव
कुछ खाली, कुछ थोड़ी भरी लोकल ट्रेन
दोनों के बीच एक बिसलरी की बोतल
बदला बदला सा पानी का स्वाद
एक जाना अनजाना स्टेशन
शहर कम गाँव ज़्यादा
फिर कुछ दूर पर वो मशहूर ढाबा
खाना बढ़िया था
बिल भी बुरा नहीं था
"अरे वेटर वो ऊपर होटल भी है क्या"
"जी साब आप जैसे कई जोड़े आते हैं ना
वो रुक जाते हैं; दो चार घंटे
कभी कभी सारी रात भी
उनके लिए है "
निगाहें मिलीं उनमे से एक जोड़ी झुकीं
एक रुकी रहीं
एक दबी हलकी सी आवाज़,
अगले हफ्ते आएंगे, आज नहीं
मैंने कहा था न मुहब्बत कोई टेढ़ी खीर नहीं है
बल्कि काफी आसान है
'दोस्त' मुझे तो पीनी है चाय
आपको नहीं चाहिए तो कोई दिक़्क़त नहीं
हैव ए गुड डे
