मंगलवार, 2 अगस्त 2022

कौन हो ?

कौन हो भाई ?

इतने धीमे से आकर खड़े हो गए ...

हमारे पीछे 

हमें तो ये भी नहीं पता कि 

पुरुष हो या महिला 

बड़े हो या अभी बच्चे ही हो

पर... जाने क्यों

तुम्हारे पैरों की आहट से

मन को एक अजीब सी शांति मिली है 

जैसे सुकून की हवा एक झोंका मेरे कमरे में आ गया हो 

और उसने मेरे पर्दों 

मेरे बालों, मेरे पौधों 

सबको एक नयी ताज़गी दे दी 

नयी ख़ुशी दे दी 

एक अरसा हो गया था

कि बिना मांगे, या ढूंढें

कुछ अच्छा मिल जाये


बताना चाहोगे, कौन हो तुम ?



डर नूतन से

ठीक है, ठीक है, माना  । क्या  माना ? यही, कि जनाब ने मुझे बुलाया नहीं था  । तो फिर ये टटपुँजिया सा वाहन लेकर यहाँ क्यों तशरीफ़ लाये हैं? क्या...