वो प्लेटफॉर्म पर खड़ा था
साधारणतया जैसी या जितनी भीड़ होती है वैसी ही थी
भीड़ कम थी, या ज़्यादा थी
ये निर्भर करता है कि इसे कौन जांच रहा है
और वो कहाँ से आया है
वातावरण में ठक-ठक की आवाज़ हो रही थी
जो बूट-पॉलिश वाले खाली बैठे थे
वो अपने-अपने डिब्बों को ठोक रहे थे
अब पॉलिश के ग्राहक काफी कम हो गए हैं
उसे पता था कि इसके अपराधी
स्पोर्ट्स टाइप के जूते हैं
जिन्हें पॉलिश नहीं किया जाता...
चर्चगेट की ट्रेन आयी
उसके रुकने के काफी पहले ही हुजूम आगे बढ़ा
झिझकता हुआ वो भी बढ़ा
पर थोड़ा पीछे रहा
ट्रेन रुकी, पहले लटके हुए लोग
लम्बी कूद लगा कर कूद पड़े
उनमे से कई, नीचे खड़े लोगों से टकरा गए
अब अंदर दबे हुए लोग लावा की तरह बाहर उगले जा रहे थे
जैसे उन्हें अपने पर नियंत्रण ही नहीं था
प्लेटफॉर्म के लोग ट्रेन के अंदर जाने के लिए ऐसे लालायित थे
जैसे एक बंधा हुए भूखा कुत्ता सामने पड़ी हड्डी को देख रहा हो
उतरती भीड़ ने बहुत ज़ोर का शोर मचाया
युद्ध के आरम्भ की गर्जना जैसा
जिसका मतलब था कि दूर रहो
हमारे उतरने में बाधा नहीं डालना ...
बिना कपड़े फटे या जेब कतरों के शिकार हुए,
ट्रेन से उतर जाने और चढ़ने को दिन की उपलब्धि कहा जा सकता है...
उसने सोचा चलो अगली बार सही
वो वापस उसी जगह पर खड़ा हो गया
जहां था
उसके जैसे असफ़ल लोग
इंडिकेटर पर अगली ट्रेन का समय देखने लगे
ट्रेन ६ मिनट के बाद आने वाली थी
६ मिनट गुज़रने में समय ही कितना लगता है
दो या तीन मिनट, बस, इससे ज़्यादा नहीं
उसने सोचा
बगल के प्लेटफॉर्म पर दूसरी तरफ जाने वाली ट्रेनें आ-जा रही थीं
यात्री भी एक तरह से उदासीन लग रहे थे
जैसे उन्हें कोई दिक्कत नहीं थी...
अगली ट्रेन आई
भीड़ फिर उसी तरह आगे बढ़ी
इस बार वो भीड़ का हिस्सा बिल्कुल नहीं बना
थोड़ा पीछे रहा
'ख़बरदार रहना' का शोर फिर से हुआ
पर उसने अनसुना कर दिया
इस बार
ट्रेन के रुकने से पहले ही उसने एक डिब्बे के बायीं ओर
एक छोटा सा गैप देख लिया था
सही समय पर
अर्जुन जैसी एकाग्रता के साथ वो आगे बढ़ा
और जैसे कहते हैं ना, 'लाइक ए फ्लैश'
उस ज़रा सी खुली जगह में विलीन हो गया
ट्रेन चल पड़ी
वो भी और लोगों की तरह पहुंच ही जायेगा
तेज़ भागती ट्रेन के शोर में
अनजान लोगों के बीच दबे हुए हुए
उसे लगा कि
उसके मोबाइल पर एक मेसेज आया है
चलो शायद कोई तो सोच रहा है
उसके बारे में
