शनिवार, 4 फ़रवरी 2023

सलाह एक दोस्त की

मैं कौन था
और क्या बन गया हूँ
पहले बेहतर था, या अब हूँ
पहले कुछ था भी,
या अभी की तरह ही कुछ नहीं हूँ
अगर कुछ था तो क्या था
और अगर अब कुछ हूँ तो क्या हूँ, कौन हूँ
पर बीच का वो समय
जब मैं कुछ से कुछ और में बदल रहा था
क्या मुझे उसके बारे में नहीं सोचना चाहिए?
वो भी आखिर मैं ही था
वो मेरे ही जीवन का समय था
हो सकता है वो समय ही बेहतर रहा हो
जब मैं बदलाव के तूफ़ानों से गुज़र रहा था
जी, बदलाव
ये शब्द कितना अर्थपूर्ण,
कितना पूर्ण लगता है
अगर चीज़ें बदल नहीं रही हैं
तो वो वास्तव में हैं ही नहीं
वो अस्तित्वहीन हैं
अर्थात शायद जब मैं 'कुछ' बन जाऊँगा
और फिर मेरा बदलना बंद हो जायेगा, 
उस समय निश्चित रूप से
मैं कुछ नहीं रह जाऊँगा
तब मैं समाप्त हो जाऊँगा 
मैं सांस लूँगा, मेरा दिल धड़केगा 
केवल उतना ही 
मेरा व्यक्तित्व समाप्त हो जायेगा 

इसलिए वो बनो
वो जीवन जिओ
जिसमें बदलते हुए समय के थपेड़े हों
उत्सुकता, व्याकुलता, चिंता, घबराहट
जीवन की ऐसी सारी सामान्य बातें
 
राह जीवन है 'दोस्त'
मंज़िल जीवन नहीं है
वो केवल एक पड़ाव है


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