बुधवार, 11 अक्टूबर 2023

एक अनजानी वजह

कुछ दिन पहले कुछ बदल गया

आहिस्ता से ...

बेहद आहिस्ता से

कई दिनों तक इसकी ख़बर भी नहीं हुई

लगा ही नहीं कि कुछ बदला है

सब ठीक ही लगता रहा


आख़िरकार जब जो जैसा रहता था

वैसा नहीं रहा

कुछ, जो रोज़ ही होता रहता था

अब नहीं हो रहा

एक अर्से से


मुझे पता है कि अगर कोई चीज़

बहुत धीरे-धीरे बदले तो समझ नहीं आती

पता ही नहीं चलता

लगता रहता है होगा कुछ,

ठीक हो जायेगा


ज़िन्दगी में सब इतने मसरूफ़ हैं

अपनी अपनी उलझनों के साथ

क्या पता किसकी उलझन कितनी मुश्किल है


बातें दो तरह से असर करती हैं

एक; एकाएक कोई बहुत बड़ी बात

या कोई ज़रा सी बात जो धीरे धीरे बहुत दिनों में बदले

ख़ैर, अगर कुछ इतने दिन चला है

तो इसकी जायज़ वजह तो होगी ही

और किसी की वजह पर शक नहीं  किया जाता

किसी की वजह पर शक करने का हक़ किसी को नहीं है

पर सभी अपने तूफानों में उलझे हैं

किसी को नहीं पता कि

कौन कैसे तूफानों से गुज़र रहा है 


... अपने तूफानों को मैं ख़ुद समझ लूँगा



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