क्या ये कहीं छुपा बैठा था
कि एकाएक साथ हो लिया
या ऊपर से टपक पड़ा
और सामने आ गया
वक़्त के पहले कोई ये नहीं सोचता था
कि देर हो गयी
या देर हो रही है
जल्दी चलना पड़ेगा
वरना अँधेरा हो जायेगा
दुकान बंद हो जाएगी
दोस्त के यहाँ खाना ठंडा हो जायेगा
वग़ैरह...
वक़्त की वजह से
दुनिया भर के झंझट दुनिया के सामने आ गए
क्योंकि अब वक़्त सबके साथ चल रहा है
क्या मुसीबत है
जब हम दोस्त के यहाँ जाते हैं
हमारी छाया साथ-साथ चलती है
वास्तव में वो छाया नहीं, वो वक़्त ख़ुद है
जो हम सबको बता रहा है
जल्दी करो, और जल्दी
या शायद, अब कुछ नहीं हो सकता
गाड़ी निकल गयी
पास की धर्मशाला में रुक जाओ
पर ज़रा जल्दी
वरना आख़िरी कमरा भी बिक जायेगा
छाया की लम्बाई हमें संकेत देती है
कि हमें क्या करना है
और किस गति से करना है
वक़्त दुनिया को चलाता है
हम सब लोगों के ज़रिये
दूसरा दृष्टिकोण
वक़्त की वजह से कई चीज़ें अपने आप भी होती जाती हैं
बोनस की तरह ऑटोमेटिक
अब वक़्त खाली तो बैठ नहीं सकता
रुक भी नहीं सकता
कुछ न कुछ तो करेगा ही बेचारा
आपकी उम्र बढ़ा देगा
कमज़ोरी बढ़ा देगा
बाल सफ़ेद कर देगा
ज़्यादा जोश आया तो बाल ... ग़ायब ही कर देगा
आवाज़ कमज़ोर कर देगा ...
पर ये सब कुछ ग़लत ही करता है
ऐसा भी नहीं है
ये बहुत कुछ सही भी करता है
आपका अनुभव और सहनशक्ति बढ़ाता है
बातचीत का तरीक़ा बेहतर कर देता है
सलीक़ा आ जाता है
वक़्त की वजह से शायद
आप सुर में गाने लगें
बेहतर लेखक बन जाएँ
ऐसी ही इधर-उधर की छोटी-मोटी वजहों से
शायद समाज में आपकी इज़्ज़त बढ़ जाये
घर में मिठाइयाँ आने लगें
हो सकता है आपको कोई पुरस्कार मिल जाये
क्योंकि अब वक़्त सबके साथ चल रहा है
क्या मुसीबत है
जब हम दोस्त के यहाँ जाते हैं
हमारी छाया साथ-साथ चलती है
वास्तव में वो छाया नहीं, वो वक़्त ख़ुद है
जो हम सबको बता रहा है
जल्दी करो, और जल्दी
या शायद, अब कुछ नहीं हो सकता
गाड़ी निकल गयी
पास की धर्मशाला में रुक जाओ
पर ज़रा जल्दी
वरना आख़िरी कमरा भी बिक जायेगा
छाया की लम्बाई हमें संकेत देती है
कि हमें क्या करना है
और किस गति से करना है
वक़्त दुनिया को चलाता है
हम सब लोगों के ज़रिये
दूसरा दृष्टिकोण
वक़्त की वजह से कई चीज़ें अपने आप भी होती जाती हैं
बोनस की तरह ऑटोमेटिक
अब वक़्त खाली तो बैठ नहीं सकता
रुक भी नहीं सकता
कुछ न कुछ तो करेगा ही बेचारा
आपकी उम्र बढ़ा देगा
कमज़ोरी बढ़ा देगा
बाल सफ़ेद कर देगा
ज़्यादा जोश आया तो बाल ... ग़ायब ही कर देगा
आवाज़ कमज़ोर कर देगा ...
पर ये सब कुछ ग़लत ही करता है
ऐसा भी नहीं है
ये बहुत कुछ सही भी करता है
आपका अनुभव और सहनशक्ति बढ़ाता है
बातचीत का तरीक़ा बेहतर कर देता है
सलीक़ा आ जाता है
वक़्त की वजह से शायद
आप सुर में गाने लगें
बेहतर लेखक बन जाएँ
ऐसी ही इधर-उधर की छोटी-मोटी वजहों से
शायद समाज में आपकी इज़्ज़त बढ़ जाये
घर में मिठाइयाँ आने लगें
हो सकता है आपको कोई पुरस्कार मिल जाये
ऐसे ही किसी वक़्त शायद
आप वक़्त को धन्यवाद भी दे दें।
