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सोमवार, 15 फ़रवरी 2016

... छोडो जाने दो


हम पहुँच न पाये वक़्त पर
अफ़सोस है तुम्हें इंतज़ार करना पड़ा
और नाराज़गी का कहर हमें झेलना पड़ा
वो तमतमाया चेहरा
वो मोती पसीने के
माथे पे होठों पे
वो झुंझलाहट की भाषा
पूरे बदन पे
तुम्हें याद हो तो
हमारी अटपटी रूकती अटकती
चाल भी कुछ कह थी
... छोडो जाने दो

पर हमें ये ग़िला रहेगा
तुम उस इंतज़ार का लुत्फ़ उठा सके
हम तो तुम्हारे इंतज़ार में
जाने क्या क्या कर गए
कितने किस्से गढ़ लिए
कितनी ग़ज़लें लिख गए
हर ख्याल के बाद

सामने
आता तुम्हारा चेहरा
और हमारे होठों पर एक मुस्कान
... ख़ैर जाने दो

मैंने तुम्हारा इंतज़ार ज़रूर किया
लम्बे इंतज़ार पे ग़ुरूर भी किया
पर तुम हमेशा मेरे साथ रही
आस पास रही
जब जब तुम नहीं आई
और मैं मुँह लटकाये वापिस गया
मैं तुम्हे भी अपने साथ ले गया
तुमने सुना ही होगा
वो मशहूर ख्याल
"तुम मेरे पास होती हो,
जब कोई दूसरा नहीं होता"
... छोड़ो ये भी जाने दो


शनिवार, 11 जुलाई 2015

नई ज़िन्दगी

अब इस ज़िन्दगी के रंग देखो,
कहीं काई तो कहीं ज़ंग देखो 

कहीं उखड़ चुकी है पपड़ी
कहीं चेहरा बदरंग देखो

चाल की ढ़लती रफ़्तार देखो
टेढ़े मेढ़े पड़ते कदम देखो

हाथों से फिसलती ताक़त देखो 
आँखों की बुझती रोशनी देखो 

बाँहों की कमज़ोरी देखो
जाँघों की मजबूरी देखो 

पुरानी छोड़ो नई बातें सोचो
दिमाग़ की गलियां तंग देखो

चलो छोड़ दो ये सब अब 
हो चुका है इनका काम देखो

बैठो 'दोस्त' और कर लो ऑंखें बंद
और फिर मन का आनंद देखो

बुधवार, 8 जुलाई 2015

चल अकेला

चले थे अपनी दुनिया का वज़न उठाये हम
ज़िन्दगी भर चलते रहे और ढ़ोते रहे
थक गए थे कंधे, कमर सख़्त हो गयी थी
पर अब उन तक़लीफ़ों का एहसास होता नहीं

परेशानियां हमेशा ही हम पर छाई रहीं
उस छाया में धूप का ज़िक्र तक मुश्किल था
भटकते रहे उम्र भर उजाले की तलाश में
पर अब उन अंधेरों की कालिख भी याद नहीं

एक शर्मसार सा चेहरा तैर जाता है ज़ेहन में
अगर वो तुम ही हो तो कह देना अगली बार
मेरी रूह भी ढूंढती रही है ऐसे ही एक चेहरे को
जिसे मैं भूल गया या नहीं, याद नहीं

आख़िर ज़िन्दगी उस मक़ाम पर आ के ठहर गई
जहां गुलशन का कारोबार रुकता नहीं
अब ना दोस्ती की ज़रुरत 'दोस्त' न दुश्मनी की
अकेले इंसान का कारवां कभी थमता नहीं

डर नूतन से

ठीक है, ठीक है, माना  । क्या  माना ? यही, कि जनाब ने मुझे बुलाया नहीं था  । तो फिर ये टटपुँजिया सा वाहन लेकर यहाँ क्यों तशरीफ़ लाये हैं? क्या...