अब इस ज़िन्दगी के रंग देखो,
कहीं काई तो कहीं ज़ंग देखो
कहीं उखड़ चुकी है पपड़ी
कहीं चेहरा बदरंग देखो
चाल की ढ़लती रफ़्तार देखो
टेढ़े मेढ़े पड़ते कदम देखो
हाथों से फिसलती ताक़त देखो
आँखों की बुझती रोशनी देखो
बाँहों की कमज़ोरी देखो
जाँघों की मजबूरी देखो
पुरानी छोड़ो नई बातें सोचो
दिमाग़ की गलियां तंग देखो
पुरानी छोड़ो नई बातें सोचो
दिमाग़ की गलियां तंग देखो
चलो छोड़ दो ये सब अब
हो चुका है इनका काम देखो
बैठो 'दोस्त' और कर लो ऑंखें बंद
और फिर मन का आनंद देखो