कहां हो तुम
कितना वक़्त गुज़र गया
तुम्हें देखे, सुने,
महसूस किये
ये दिन, ये रात
सुबह, शाम
मिल गए, घुल गए
एक दूसरे में
ख़त्म हो गया फर्क
अँधेरे और उजाले का
कहां हो तुम
चले गए तुम जाने कहां
शायद, तुम्हे जाना था जहां
अब तुम्हारे नये अपने हैं
और पुराने पराये हैं
ख़ाली हो गया जहाँ मेरा
तुम्हारे चले जाने से
अब मैं और मेरा ये खालीपन
पूरा कर रहे हैं एक दूसरे की कमी को
दोनों को इंतजार है तुम्हारा
कहां हो तुम
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