तेरे ऊँचे उजले उरोज़ों के बीच
वो गहरा अँधेरा गलियारा
दोनों उरोजों को अलग करती
एक अनजानी, अनछुई घाटी
मेरी बेशर्म, बेसब्र निगाहें
उन खूबसूरत रेशमी
उरोज़ों से फिसल कर
बेख़ौफ़ पहुँच जाती हैं
उस जादुई गलियारे में
जहाँ कुछ दिखाई नहीं देता
अँधेरे के सिवा
कुछ याद नहीं रहता
तेरे सिवा
कुछ सुनाई नहीं देता
तेरी धडकनों के सिवा
कोई डर नहीं लगता
लगता है ज़िन्दगी का सारा सुकून
है उसी वादी में
काश अब कोई न बुलाये
न मिलने आये
मौत के सिवा
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