ज़िन्दगी में मिले कई
कभी हाँ कभी न वाले दोस्त
कभी वादे निभाने
कभी न निभाने वाले दोस्त
उनकी भावनाएं रूकती और चलती हैं ऐसे
दिवाली की जलती बुझती लाइटें हों जैसे
अब ये जगह मुझे रास नहीं आ रही
या शायद इस जगह को ही मैं नहीं भा रहा
यहाँ एक गीत याद आया,
'ऐ मेरे दिल कहीं और चल'
वाक़ेई इस गीत ने मेरी ज़रुरत समझी है
मुझे एक नयी दुनिया की तलाश करनी चाहिए
भले ही ऐसी ही पर दूसरी
इसलिए तुम बिलकुल परेशानी मत उठाओ
और रहने दो वो अपने बचे हुए कस्में वादे
आधे अधूरे ही
जो बाकी हैं वो हो जायेंगे पूरे
शायद हो ही जायेंगे
कहीं और, किसी दूसरी दुनिया में
फिर ये ज़रूरी तो नहीं
कि सब कुछ पूरा ही हो ज़िन्दगी में
दुनिया में आधी अधूरी चीज़ें भी होती है
और वो खूबसूरत भी हो सकती हैं
बल्कि होती हैं
अधखिली कलियाँ कम नहीं होतीं
खिले हुए फूल से
आधी मुस्कान
आधा चाँद
चौदवीं का चाँद
आधे पहने कपड़े
आधी हाँ आधी ना
तो जा रहा हूँ 'दोस्त'
पर शायद आधे मन से
ढूँढने वो जहाँ, जहाँ
अधूरे ख्वाबों की
अधूरे वादों की
अधूरे रिश्तों की
अधूरी ही सही
पर इज्ज़त होगी
इज्ज़त होगी अधूरेपन की

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