जाने क्या तुमने कही
जाने मैंने क्या सुनी
बात कुछ बिगड़ सी गयी
जाने क्या तुमने कही
चेहरा तमतमा सा गया,
मन में गुस्सा भर गया
कस गयीं नसें दिल की,
बात बस बिगड़ सी गयी
आँखें ताज्जुब से फटीं
और नीचे को झुकीं,
सपने सब बिखर से गए,
बात बस बिगड़ ही गयी
खुल गए राज़ कई
पी लूं आज ज़हर कोई
ख़त्म कर दूँ सब यहीं
ख़त्म कर दूँ सब यहीं
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