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गुरुवार, 30 जुलाई 2015

कभी कभी...

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है 
कि जीवन के सफ़र में राही,
मिलते हैं साथ निभाने को 
जीवन भर ना सही
कुछ पल की खुशियाँ बढाने को
मंज़िल तक न सही,
कुछ क़दम साथ निभाने को

जीवन की खुशियों के साथ 
झूम झूम के नाचो गाओ
जो चला गया उसे भूल जाओ 
क्या पता इस साथ का मीठा स्वाद
आगे चल कर कड़वा हो जाये
इसकी महक बदल जाये

जो हो रहा है, सही हो रहा है 
जो होगा वो भी सही होगा 
इस सच से दोस्ती कर लो
तो ग़मों के सारे अफसाने,
अफसाने ही रह जायेंगे 
इस पुराने गीत की तरह -
'जीवन के सफ़र में राही
मिलते हैं बिछड़ जाने को'



बुधवार, 29 जुलाई 2015

चलो एक बार फिर से...

चलो एक बार फिर से हमसफ़र बन जाएँ हम दोनों

न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखूँ अजनबीपन की
न तुम मेरी तरफ देखो, देखा हो जैसे ग़ैरों को
न मेरे पैर डगमगाएं साथ चलने में
न आँखें झुक जाएँ तुम्हारी, राह में मिल के
चलो एक बार फिर से...

तुमको नहीं उलझन अपनी ख़ाली ज़िन्दगी से
न कोई परेशानी मुझे अपने पत्थर दिल से
पर चले थे साथ तो शायद कुछ और भी चल लेते
अपने बीच उन बुझे दियों को रोशन कर देते
चलो एक बार फिर से...

ख़तम होने लगे रिश्ता तो उसको रोकना बेहतर
ज़िन्दगी बोझ बन जाये तो उसको बांटना अच्छा
ग़ज़ल जो बीच में ही रह गयी थी आधी अधूरी सी
उसे एक खूबसूरत शेर दे कर छोड़ना अच्छा
चलो एक बार फिर से...



राजू को नींद आयी


मैं ये सोच कर एक बाग़ में रुका था
कि कुछ देर रुक कर सुस्ता सकूंगा
बगीचे की
ठंडी हवा थी सुहानी
कुछ देर शायद सो भी सकूंगा
भटकते हुए मुझको दो दिन हो गए थे
खाना न सही, आराम तो मिलेगा
मगर उसने देखा, वो नजदीक आया
'सोना यहाँ मत', ये सुनके घबराया
थी उसकी आवाज़ भारी, फिर भी वो चिल्लाया
वक़्त की नज़ाकत को ज्यों ही मैं समझा
जल्दी से उठ के खड़ा हो गया मैं
खड़ा हो गया मैं
दफ़ा हो गया मैं
दफ़ा हो गया मैं

शुक्रवार, 10 जुलाई 2015

बात बस बिगड़ सी गयी

जाने क्या तुमने कही
जाने मैंने क्या सुनी
बात कुछ बिगड़ सी गयी
जाने क्या तुमने कही

चेहरा तमतमा सा गया, 
मन में गुस्सा भर गया
कस गयीं नसें दिल की, 
बात बस बिगड़ सी गयी

आँखें ताज्जुब से फटीं
और नीचे को झुकीं
सपने सब बिखर से गए, 
बात बस बिगड़ ही गयी

खुल गए राज़ कई 
पी लूं आज ज़हर कोई 
ख़त्म कर दूँ सब यहीं 
बात बस बिगड़ थी गयी



डर नूतन से

ठीक है, ठीक है, माना  । क्या  माना ? यही, कि जनाब ने मुझे बुलाया नहीं था  । तो फिर ये टटपुँजिया सा वाहन लेकर यहाँ क्यों तशरीफ़ लाये हैं? क्या...