कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
कि जीवन के सफ़र में राही,
मिलते हैं साथ निभाने को
जीवन भर ना सही,
कुछ पल की खुशियाँ बढाने को
मंज़िल तक न सही,
कुछ क़दम साथ निभाने को…
जीवन की खुशियों के साथ
झूम झूम के नाचो गाओ
जो चला गया उसे भूल जाओ
क्या पता इस साथ का मीठा स्वाद
आगे चल कर कड़वा हो जाये
इसकी महक बदल जाये
जो हो रहा है, सही हो रहा है
जो होगा वो भी सही होगा
इस सच से दोस्ती कर लो
तो ग़मों के सारे अफसाने,
अफसाने ही रह जायेंगे
इस पुराने गीत की तरह -
'जीवन के सफ़र में राही
मिलते हैं बिछड़ जाने को'
