ऐसी ऐसी, ऐसी ऐसी
कि पूछो मत कैसी कैसी
बेहद अजीब हों जैसी
बिल्कुल नामुमकिन हों, वैसी
मैंने कहाँ से सीखा
अरे ये तो आसान है
इसकी कोई क़ीमत नहीं
आसान ख़्वाहिश की ख़्वाहिश भी, ख़्वाहिश कैसी
तो मैंने सोचा कि
ऐसी हर एक चीज़, जो हो एक ग़ज़ब की मुश्किल
जो हो इतनी मुश्क़िल, इतनी मुश्क़िल
कि उसकी ख़्वाहिश से ही दम घुट जाये
बरसों की मेहनत के बाद आख़िर
मुझे मिल ही गया वो ख़्याल
पर मिल न सके
सामने हो पर
उसे छुआ ना जा सके
ये दिखाई देते हैं, बस
बस इतना ही
देखिए और खुश रहिये
चलिए 'दोस्त' मुश्किल थोड़ी आसान कर देते हैं
जी मेरा मतलब है ये लफ्ज़ 'हज़ारों' हटा देते हैं
ग़ालिब बड़े शायर थे मैं उनका
एक हज़ारवां हिस्सा भी नहीं हूँ
"एक ख़्वाहिश ऐसी कि उस एक से ही दम निकले"









