क्या दर्द एक अँधेरा है
या अँधेरा एक दर्द है
या शायद ये दर्द का अँधेरा है
पर ये कालिख पुते दिन रात
सवेरा नहीं होने देते
ज़िन्दगी में मेरी
ये कहाँ के बादल हैं
जिन्होंने ढक दिया
तुम्हारा चाँद सा चेहरा
वो सूरज सी मुस्कान
अब न तो तुम हो
और न तुम्हारा नाम
बचा है तो सिर्फ तुम्हारा ग़म
गुज़र जाएगी बाक़ी भी
इसी ग़म के सहारे 'दोस्त'
पर उफ़ ये अधेरा...