एक ग़ज़ल कहने की कोशिश में हाथ रुक गए,
मिन्नतों के बाद भी लफ़्ज़ों के अंदाज़ रुक गए
मांगी मदद अल्लाह से, सिर्फ एक अदद ख़याल की,
ख़याल की तो छोडिये उनके किवाड़ बंद हो गए
ग़ज़ल बहती रही है और बहती ही रहेगी,
पर आज उसके बहने के सब बहाने रुक गए
हम तो समझे थे कोई ख़ास मुश्किल न पेश आयेगी,
पर कलम खामोश रही और स्याही के रंग उड़ गए
मक़ता तो है बहुत दूर इस ग़ज़ल के लिये 'दोस्त',
मतले में ही इस दिमाग़ के कारोबार रुक गए