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गुरुवार, 16 जुलाई 2015

एक अनिश्चित भविष्य

मुस्कराहट
तुम्हारे चेहरे की मुस्कराहट
देख पाना मुश्किल था
मुस्कराहट ही नहीं बल्कि उसका अंश भी 
वो है या नहीं 
शायद है और शायद नहीं 
क्या वो इतनी कमज़ोर है 
कि दिखाई नहीं देती 
या इतनी मुश्किल है कि समझ नहीं आती  
शायद बेहद ध्यान से देखना पड़े 
नहीं तुम्हारे चेहरे को नहीं 
मुस्कराहट को 
मुस्कराहट को ढूंढने के लिए 
मुझे पता है कि वो है यहीं

शायद उस मुस्कान ने भी मुंह मोड़ लिया है मुझसे 
तुम्हारी तरह 
मन तो चाहता था कि वो मुस्कान
दे देती मुझे भी 
मुस्काने के बहाने 
एक बीमारी की तरह 
वो मुझे भी बीमार कर जाती
मुझे मुस्कराता हुआ छोड़ जाती
वो शायद मेरे साथ लुका छिपी खेल रही है 
जैसे तुम खेलती थी 
पर ये मेरे साथ क्यों खेल रही है 
इसे तो तुम्हारे चेहरा पर खेलना चाहिए

डर नूतन से

ठीक है, ठीक है, माना  । क्या  माना ? यही, कि जनाब ने मुझे बुलाया नहीं था  । तो फिर ये टटपुँजिया सा वाहन लेकर यहाँ क्यों तशरीफ़ लाये हैं? क्या...