अब न मिल पायेगी तुमको
तुम अकेले उस तरफ निकल गए
मैं भी कहीं और जा रहा हूँ
ज़िन्दगी की उलझनों में उलझा हूँ
सबको निभानी है दुनियादारी
अब तो ऊपर की ज़रूरतें
हो गयी हैं ज़्यादा ज़रूरी
वो ज़रूरतें जिनके बग़ैर
ज़िन्दगी रुक सकती है
अब प्यार की बात मत करो
सोने, चांदी और नक़द की बात करो
एक हसीन बोसे की बजाय
अच्छे कपड़ों का ज़िक्र हो
आँखों में उम्मीदों की चमक नहीं
गाड़ी की चमक की बात करो
याद नहीं महक महबूब के बदन की
उसकी ज़ुल्फ़ों की
अब तो इत्र की क़ीमत
और खुशबू की बात करो
नशीली आँखों का ज़िक्र छोडो
जाम-ओ-मीना के सुरूर की बात करो
इन सबके बग़ैर रुक जाएगी ज़िन्दगी
प्यार मोहब्बत न हो तो ज़िन्दगी नहीं थमती
मोहब्बत किसी काम नहीं आती
मोहब्बत है क्या
एक एहसास ही तो है
एहसास-ए-मोहब्बत से ज़िन्दगी नहीं चलती 'दोस्त'
वो पहली सी मोहब्बत
अब न मिल पायेगी किसीको