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शनिवार, 25 जुलाई 2015

वो कहां मैं कहां

सपनों की दुनिया में है उसका जहांऔर मैं हूँ यहां
खबर नहीं वो है कहां, कितनी दूर है मुझसेमैं हूँ जहां

उसके दोस्तों की महफ़िलवो खुश गवार लम्हे
मुझे मिला साथ इस तन्हाई कामैं हूँ जहां

वो खिलखिलाती शोख़ नज़रें  और हंसी के झरने
मुरझाए सपनों का गुलिस्तां है यहाँ, मैं हूँ जहां

दोस्तों का साथ, वो बाहों के हार, और दिल की बातें 
ढूंढता हूँ खुशियाँ अपने आगोश मेंमैं हूँ जहां

काश मेरे क़दम पहुँच पाते ज़ुल्फ़ के उस मोड़ तक
पर कहाँ वो ज़ुल्फ़, वो हसीन मोड़ और मैं हूँ कहां

काश कोई मोड जोड़ देता हमारी ज़िन्दगी को 'दोस्त'
पर नहीं थी किस्मत में तेरी रहगुज़रमैं हूँ जहां

डर नूतन से

ठीक है, ठीक है, माना  । क्या  माना ? यही, कि जनाब ने मुझे बुलाया नहीं था  । तो फिर ये टटपुँजिया सा वाहन लेकर यहाँ क्यों तशरीफ़ लाये हैं? क्या...