मिल जाते हैं अब भी वो लम्हे कभी कभी
जिनके साथ बैठ, दो लम्हे गुज़ारे थे कभी
ये वक़्त जो सबसे ही मुंह मोड़ लेता है
इसी वक़्त ने कीमती तोहफे, दिए थे कभी
दोस्तों की वो बातें, बिलावजह हंसना हंसाना
बिलावजह ज़हन में आ जाती हैं, कभी कभी
काफी कुछ होना है शायद जिंदगी में अभी भी
पर ये वक़्त ही ठहरा सा लगता है कभी कभी
चाल की तेज़ी, बातों की रफ़्तार, ख्यालों की रवानी
सब कुछ धीमा सा लगता है, मुझको कभी कभी
अब तो जो भी ज़िन्दगी में होना बाकी है 'दोस्त'
शायद उसी की कमी महसूस होती है कभी कभी