मुश्किलें हैं तो क्या हुआ
नामुमकिन तो नहीं हैं
जब से मैंने इनको तव्वजोह देना बंद कर दिया
ये मेरे आगे पीछे घूमने लगीं
मैंने फिर भी हवा न दी
अरे भाई जब इंसान का काम आसानी से चल जाता है
तो मुश्किलों की क्या ज़रुरत है
तो जनाब मेरे इन नए तेवरों से
मुश्किलों की शक्ल उड़ी उड़ी लगने लगी है
घबरा सी गयी लगती हैं
ख़ैर बहुत परेशान कर लिया इन्होनें मुझे
इन्हें अपने पर कुछ ज़्यादा ही घमंड हो गया था
और घमंड तो एक दिन टूटना ही था
ये हमेशा ही टूटता है
सही वक़्त आ जाये तो किसी भी मुश्किल का घमंड
आसानी से टूट जाता है