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शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

चंदा मामा दूर के

आओ कल्पना की उड़ान भरें
अपने कदम चांद पर धरें

चलो परखें चांद की ज़मीन को
आधे अँधेरे आधी रोशनी को

अपना भार चांद पर जांचें
हिरन के जैसे भरें कुलांचें

पहाड़ और पाताल में भागें
कोई पीछे तो कोई आगे

तोडें कीर्तिमान ऊंची कूद के
सब मिल गायें चंदा मामा दूर के











डर नूतन से

ठीक है, ठीक है, माना  । क्या  माना ? यही, कि जनाब ने मुझे बुलाया नहीं था  । तो फिर ये टटपुँजिया सा वाहन लेकर यहाँ क्यों तशरीफ़ लाये हैं? क्या...