मेरे अपनों के ग़म, अब मेरे हो गए लगते हैं
वो सब लोग अब, और भी अपने से लगते हैं
दुनिया में सारे दोस्तों के दर्द अब तो
खुद ही मेरे दिल में बस गए लगते हैं
खुद ही मेरे दिल में बस गए लगते हैं
उनके ग़मों की काली घटाओं के आगे
मेरे ही ग़म मुझे फीके फीके से लगते हैं
वहां कोई है अकेला और वो ज़रा बीमार से रहते हैं
हम इसीलिए उनके ग़मों से बेज़ार रहते हैं
किसी घर में मातम है उनके वापस न आने का
कोई परेशां है, घर में हमेशा ही मेहमान रहते हैं