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शुक्रवार, 17 जुलाई 2015

इंतज़ार - इस पार भी उस पार भी


एक टूटा फूटा सा मकान
उसमें नाई की एक दूकान 
देहलीज पे पेपर पढ़ता नाई नौजवान 
पर ज़रूरी नहीं कि ये पेपर आज का हो 
पेपर की तारीख पर मत जाइये 
उसका काम किसी भी पेपर से चल जायेगा 
वो कोई भी पेपर सामने रख सकता है 
उल्टा या फिर सीधा पकड़ सकता है
शायद वो पढ़ ही नहीं सकता
शायद ये मैं ग़लत कह गया
अजीब सी बात है 
नाई पेपर नहीं पढ़ रहा
लगता है पर है नहीं
असल में वो कोई और ही काम कर रहा है 
एक बेहद ज़रूरी काम
जी हाँ बिना हिले डुले 
बिना कुछ बोले, बतियाए या हाथ हिलाए 
इस तरह तो एक ही काम हो सकता है
इंतज़ार
नौजवान नाई को है इंतज़ार 
किसी लम्बे बालों वाले लड़के का 
या दाढ़ी खुजाते बूढ़े का
उसकी नज़र गली में हर आते जाते पर टिक जाती है 
कभी कभी मिल भी जाती है  
पर फिर फिसल जाती है 
कब आयेगा कोई ऐसा 
जो सामने रुके, उसे देखे 
मुस्कराए और अन्दर आये
बड़ी सी कुर्सी पर बैठ जाये 
अपने दुखड़े रोये उसके सुने 
दाढ़ी बनवाए बाल कटवाए 
फिर खुद को देख खुश हो जाये
हाथ मिलाये
और शीशे के आगे दस रुपये रख जाये 

इंतज़ार बेहद ज़रूरी है
इस नौजवान के लिए 
भले ही वो कुर्सी झाड़ रहा है 
शीशा साफ़ कर रहा है 
पेपर को देख रहा है 
गली को ताक रहा है 
शिकार का इंतज़ार कर रहा है 
पर इंतज़ार भी कहाँ आसान होता है 
इंतज़ार से पेट अकड़ जाता है 
सर में दर्द हो सकता है 
पेपर हाथ से गिर सकता है

नाई की आँखों के सामने जो दुनिया है 
उसमें एक गली है
गली में चहल पहल है 
लोग हैं, गाय हैं, भैंस और कुत्ते भी हैं 
कुछ स्कूटर साइकिल और ठेले भी हैं 
पर किसीने उसकी आँखों के अन्दर अभी तक नहीं झाँका
उसकी आँखों के उस तरफ क्या है
कौन सी और कैसी दुनिया है
ये किसीको खबर नहीं
किसीसे उसकी नज़रें मिल ही नहीं पातीं
उसकी आँखों के उस पार, वहां
एक दूसरी ही दुनिया मिली
मिलती जुलती पर दूसरी
उसमें भी इस दूकान जैसा एक जर्जर एक मकान है
दीवार का सहारा लिए एक कंकाल है
ये औरत नाई की बीवी है 
उसकी आँखें बंद हैं 
स्तन खुला है
पप्पू भूख से गोद में रो रहा है 
बबली का स्कूल जाना बंद हो गया है
चूल्हा ठंढा है
बर्तन ख़ाली हैं
सभी कर रहे हैं,
किसी किसी का इंतज़ार

आँखों के इस पार या उस पार



डर नूतन से

ठीक है, ठीक है, माना  । क्या  माना ? यही, कि जनाब ने मुझे बुलाया नहीं था  । तो फिर ये टटपुँजिया सा वाहन लेकर यहाँ क्यों तशरीफ़ लाये हैं? क्या...