गुरुवार, 15 अक्टूबर 2020

लेखक

"साब आज इधर वाली टेबल ले लीजिये"

"ठीक है... कोई ख़ास आने वाला है क्या ?"

"अरे वही मालिक के रिश्तेदार... फिर से"

"कोई बात नहीं, ज़रा वो ऐश ट्रे दे देना  

पानी थोड़ा दूर ही रखो 

कहीं हाथ लग गया तो इस कंप्यूटर की मौत समझो

और इसकी मौत से पता नहीं कितनी ज़िंदगियाँ उलझी हुई हैं

नहीं कुछ पूछना मत

मतलब चाय कॉफी के लिए

मैं ही बुला लूँगा

ये पंखा कितनी आवाज़ करने लगा है ना आजकल

इसमें थोड़ा तेल डालने की ज़रुरत है

देखो न कितनी खचर खचर कर रहा है

अब ऐसे में रोमांटिक मूड बने तो कैसे बने

कल हीरो ने लड़की को पिक्चर के लिए राज़ी कर लिया था

इतने इस पंखे के शोर में तो दोनों को मोटर बोट में भेजना पड़ेगा

खचर खचर खचर खचर

चलो यार चाय ही ले आओ

और सुनो... वो समोसे, कबके ताज़े हैं?

अगर परसों तक के हैं तो एक ले आओ

दो हरी मिर्चों के साथ 

और अपना वो पीले रंग का टोमेटो सॉस मत भूलना

चाय मक्खी के बग़ैर हो तो बेहतर होगा

अरे सुनो सुनो... इतनी जल्दी भी क्या है

जब तक चाय ठंडी होती है न्यूज़ पेपर दे जाओ

... भई वाह आज तो चाय खासी गरम है

ये लो एक बेहद ज़रूरी बात तो हम भूल ही गए

बाहर हमारी साइकिल खड़ी है

उसपे नज़र मारते रहना

हाँ अब मन को शांति मिली

टपरी के कोने पे हीरो हेरोइन एक कटिंग चाय आपस में शेयर कर रहे हैं

अब 'दोस्त' इतने झंझट में रोमांटिक सीन 

इससे ज़्यादा रोमांटिक नहीं हो सकता

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

डर नूतन से

ठीक है, ठीक है, माना  । क्या  माना ? यही, कि जनाब ने मुझे बुलाया नहीं था  । तो फिर ये टटपुँजिया सा वाहन लेकर यहाँ क्यों तशरीफ़ लाये हैं? क्या...