गुरुवार, 15 अक्टूबर 2020

क्या ख़याल है आपका

ये दुनिया जो हम देखते हैं

लोगों को आते जाते

खाते पीते झगड़ते बतियाते

कुत्ते बिल्लियां चूहे छछूंदर

गौरैय्या बुलबुल कौव्वे कबूतर 

आसमान में उड़ते चील, बाज़

उड़ती पतंग हवाई जहाज़

समंदर तालाब नदी नाले

लिखने वाला पढ़ने वाले ...

किसीने कहा ये सब मिथ्या है

है कुछ नहीं, बस हमने सोच लिया है

अगर मेरी कल्पना में नाव कभी आयी नहीं

तो आंखें उसे देख न पाएंगी कभी...

तुम मेरे सामने हो या मेरे ख़याल में हो

या मेरे ख़यालों की वजह से सामने हो

मैं भी शायद एक ख़्याल हूँ  

पर मैं जैसा हूँ वो अपने ख़्याल से हूँ...

क्या तुमने मुझे जैसा सोचा था, वैसा मैं हूँ?

अगर नहीं तो तुम मेरे बारे में अपने ख़्याल बदल के मुझे बदल दो 

मैं भी शायद अपने ख़्याल बदल के तुमको बदल दूंगा

हर एक का अपना ख़्याल है, अपनी दुनिया है


आख़ीर में 
ग़नीमत है 'दोस्त' ये दुनिया, ख़्याली दुनिया है




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