लोगों को आते जाते
खाते पीते झगड़ते बतियाते
कुत्ते बिल्लियां चूहे छछूंदर
गौरैय्या बुलबुल कौव्वे कबूतर
आसमान में उड़ते चील, बाज़
उड़ती पतंग हवाई जहाज़
समंदर तालाब नदी नाले
लिखने वाला पढ़ने वाले ...
किसीने कहा ये सब मिथ्या है
है कुछ नहीं, बस हमने सोच लिया है
अगर मेरी कल्पना में नाव कभी आयी नहीं
तो आंखें उसे देख न पाएंगी कभी...
तुम मेरे सामने हो या मेरे ख़याल में हो
या मेरे ख़यालों की वजह से सामने हो
मैं भी शायद एक ख़्याल हूँ
पर मैं जैसा हूँ वो अपने ख़्याल से हूँ...
क्या तुमने मुझे जैसा सोचा था, वैसा मैं हूँ?
अगर नहीं तो तुम मेरे बारे में अपने ख़्याल बदल के मुझे बदल दो
मैं भी शायद अपने ख़्याल बदल के तुमको बदल दूंगा
हर एक का अपना ख़्याल है, अपनी दुनिया है
आख़ीर में ग़नीमत है 'दोस्त' ये दुनिया, ख़्याली दुनिया है
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