"ठीक है। मैं जा रहा हूँ नहाने। अब तब तक मुंह नहीं दिखाऊंगा जब तक पूरी तरह साफ़ सुथरा ना बन जाऊं। कसम खा ली है। भूल चूक माफ़। समझ लो अब तो दीवाना निकल पड़ा है कमर में तौलिया बाँध कर। मुझे रोकने के बारे में तो सोचना भी मत। पीछे मुड़ने का कोई रास्ता नहीं है। मैंने पूरी सफाई करने की ठान ली है। खुद की सफाई को हम हरगिज़ भुला सकते नहीं, ठन्डे पानी से नहा सकते हैं लेकिन वापस आ सकते नहीं। "
***
वो तौलिया बांधे वापस लौटा।
"मैं आ गया। कहाँ हो भई ?" वो आई और मुझे अजीब नज़रों से देखा।
"कौन हैं आप "
"अरे मैं ! याद नहीं ये तौलिया ? इसी में तो मैं गया था। "
"माफ़ कीजिये शायद आपसे भूल हुई है। वो तो इतने साफ़ कभी नहीं दिखते। आप पड़ोसी की घंटी बजा कर पूछ लीजिये अगर वो आपको पहचानते हैं।"
"क्या ग़ज़ब कर रही हो मैं उनसे क्यों पूछूं ? अरे रुको। ये मैं ही हूँ। ये देखो कंधे पर ये निशान।"
"अरे ऐसे निशान तो कितनो के देखे मैंने।"
"क्या कहा? कितनो के !"
"हाँ वही तो कहा मैंने।"
"अच्छा सुनो सुनो, तुम्हें याद है जब हमने एक फिल्म देखने का प्लान बनाया था पर जा नहीं पाए। याद आया? और फिर पिछले महीने हम महाबलेश्वर जाने वाले थे पर टिकट नहीं मिले। ये सारी प्यार भरी बातें तुम्हें बिलकुल याद नहीं ?"
"क्या तुम उस मराठी कॉमेडी फिल्म की बात कर रहे हो जो हम देख नहीं पाए ?"
"हाँ हाँ वोही। वही हूँ मैं। क्या यार तुमने तो टेंशन में डाल दिया था। अरे ठीक है अब रोओ मत। ग़लती इंसान से ही होती है। जो हुआ सो हुआ। देखो न कितने आंसू बहा दिये। आओ इस तौलिये से पोंछ दूँ।"
"क्या!! तौलिये से, नहीं नहीं रहने दो , मैं टिशू ले लूंगी।"
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