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शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

आज का सुपरमैन

मुट्ठी बांधी कस के, ऊपर को हाथ बढ़ाया
उठा शरीर हवा में, लो सुपरमैन आया

उतरा सौवीं मंज़िल पर आग बुझाने
घबराए सहमे लोगों की जान बचाने


गिरते बच्चे को पकडा, उड़ कर दिया सहारा
प्यार से उसे, अचंभित माँ के पास उतारा

कोयला बन गया हीरा, उसकी हथेली में दब कर
टूटते बाँध को बचा लिया, समय पलट कर

आज का सुपरमैन है तीन बातों पर निर्भर
क्लास्सिकल म्यूजिक, कराटे... और कम्पूटर


डर नूतन से

ठीक है, ठीक है, माना  । क्या  माना ? यही, कि जनाब ने मुझे बुलाया नहीं था  । तो फिर ये टटपुँजिया सा वाहन लेकर यहाँ क्यों तशरीफ़ लाये हैं? क्या...