अगर मुझे लगा कि तुम मुझे भला समझते हो,
तो मैं भी तुम्हें भला ही समझूंगा।
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जब मैं अपने ही कर्मों के साथ होता हूँ
तब कोई समस्या नहीं होती
वो मेरे साथ कभी कपट नहीं करते
नतीजा हमेशा उचित ही होता है।
दूध का दूध पानी का पानी।
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हमारे चारों ओर अनगिनत विचार और वस्तुएं बिखरी हुई हैं।
हर विचार या वस्तु को हर व्यक्ति अपनी ही समझ से देखता है।
इस कारण उन सब विचारों और वस्तुओं के और भी कई गुने अधिक रूप बन जाते हैं।
हर मनुष्य का हर वस्तु के बारे में अपना अलग सत्य होता है।
ये सत्य भी मानव के उस एक क्षण के और एक मानसिक स्थिति के लिए ही होता है।
तो क्या संसार में सब कुछ सत्य ही है? असत्य कुछ भी नहीं?
कदाचित।
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तो मैं भी तुम्हें भला ही समझूंगा।
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जब मैं अपने ही कर्मों के साथ होता हूँ
तब कोई समस्या नहीं होती
वो मेरे साथ कभी कपट नहीं करते
नतीजा हमेशा उचित ही होता है।
दूध का दूध पानी का पानी।
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हर विचार या वस्तु को हर व्यक्ति अपनी ही समझ से देखता है।
इस कारण उन सब विचारों और वस्तुओं के और भी कई गुने अधिक रूप बन जाते हैं।
हर मनुष्य का हर वस्तु के बारे में अपना अलग सत्य होता है।
ये सत्य भी मानव के उस एक क्षण के और एक मानसिक स्थिति के लिए ही होता है।
तो क्या संसार में सब कुछ सत्य ही है? असत्य कुछ भी नहीं?
कदाचित।
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