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रविवार, 8 अगस्त 2021

अरज है इतनी

अरज है इतनी
दरस दिखाओ
... यहाँ आओ या वहां आओ 
घर पे या बाहर ही आओ 
बताओ कब आओगे 
और फिर वादा निभाओ 
कितने दिन हो गए 
हाँ हाँ करते
यहाँ वहां करते 
आज नहीं कल करते 
अभी नहीं फिर कभी कहते 

ज़माने की फिकर है तुमको
तुमसे बहुत काम होगा सबको 
कभी मेरा भी कोई काम कर जाओ 
अब दोस्ती एक तरफ़ा तो नहीं हो सकती 
तुम्हारा नाम अच्छे लोगों में शामिल है 
क्योंकि तुम सबकी मदद करते हो 
पर क्योंकि उन सब में मैं शामिल नहीं हूँ 
इसलिए उन सबको 'सब' नहीं कहा जा सकता 
कभी सोचा है इसके बारे में 
शायद तुम बड़ा सोचते हो 
जहाँ सब शामिल हों वो बड़ा हो गया 
पर मुझे भी शामिल करने से 
वो कुछ ज़्यादा बड़ा हो जायेगा 
और तुम उसे संभाल नहीं पाओगे 
या मेरी वजह से उसकी कीमत कम हो जाएगी 

शायद मैं कुछ ज़यादा ही अक्ल लगा बैठा 
खैर फिर भी 
हो सके तो आओ
दरस दिखाओ 
अरज तो इतनी ही थी

डर नूतन से

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